दूसरी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की घोषणा, लेकिन सेवा में आई अलग ट्रेन | Second Vande Bharat Sleeper Announced, Different Train Launched
मुख्य बिंदु (Key Highlights)
- छहर्टा-वाराणसी मार्ग पर दूसरी वंदे भारत स्लीपर के रूप में घोषित ट्रेन एक मिश्रित श्रेणी की एक्सप्रेस निकली।
- रेल मंत्रालय के रिकॉर्ड में हावड़ा-कामाख्या ही एकमात्र वंदे भारत स्लीपर सेवा बनी हुई है।
- प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में भी इसे 'वंदे भारत' के रूप में नहीं पहचाना गया।
- वास्तविक वंदे भारत स्लीपर ट्रेन 16 कोच वाली पूरी तरह वातानुकूलित होती है, जबकि शुरू हुई ट्रेन 14 कोच की मिश्रित श्रेणी की थी।
- रेलवे ने 260 वंदे भारत स्लीपर रेक बनाने की योजना बनाई है, लेकिन अब तक केवल दो ट्रेनसेट ही निर्मित हुए हैं।
भारत में दूसरी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को लेकर एक महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है। जुलाई में छहर्टा-वाराणसी मार्ग पर जिस ट्रेन को दूसरी वंदे भारत स्लीपर सेवा के रूप में घोषित किया गया था, वह वास्तव में एक मिश्रित श्रेणी की एक्सप्रेस ट्रेन निकली। रेल मंत्रालय के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, देश में अभी भी केवल हावड़ा-कामाख्या मार्ग पर ही वंदे भारत स्लीपर सेवा चल रही है।
घोषणा और वास्तविकता में अंतर | Discrepancy Between Announcement and Reality
14 जुलाई को, रेलवे सप्लाई ने बताया था कि ट्रेन संख्या 14624/14623 छहर्टा और वाराणसी के बीच संत रविदास एक्सप्रेस के नाम से भारत की दूसरी वंदे भारत स्लीपर बनेगी। हालांकि, तीन दिन बाद, 17 जुलाई को जारी प्रधानमंत्री के आधिकारिक कार्यक्रम में इस सेवा को केवल अमृतसर (छहर्टा)-वाराणसी ट्रेन सेवा के रूप में वर्णित किया गया था, जिसमें इसे 'वंदे भारत' के रूप में नहीं बताया गया।
ऑपरेशन शुरू होने के बाद यह अंतर और स्पष्ट हो गया। द ट्रिब्यून ने बताया कि शुरू की गई ट्रेन 14 कोच वाली थी, जिसमें सेकंड क्लास AC, थर्ड क्लास AC, नॉन-AC स्लीपर और जनरल कोच शामिल थे। इसके विपरीत, भारतीय रेलवे द्वारा परिभाषित वास्तविक वंदे भारत स्लीपर ट्रेन 16 कोच वाली, पूरी तरह वातानुकूलित ट्रेनसेट होती है, जिसमें केवल AC फर्स्ट क्लास, AC टू-टियर और AC थ्री-टियर आवास होता है।
मंत्रालय का आधिकारिक अपडेट | Ministry's Official Update
23 जुलाई को, छहर्टा-वाराणसी सेवा के उद्घाटन के छह दिन बाद, रेल मंत्रालय ने एक राष्ट्रव्यापी वंदे भारत स्थिति अपडेट जारी किया। इस अपडेट में भी हावड़ा-कामाख्या को ही पहली और एकमात्र वंदे भारत स्लीपर सेवा के रूप में पहचाना गया। मंत्रालय ने यह भी बताया कि दो स्लीपर ट्रेनसेट निर्मित किए जा चुके हैं, लेकिन छहर्टा-वाराणसी को परिचालन वंदे भारत स्लीपर के रूप में शामिल नहीं किया गया। रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने फरवरी में 260 वंदे भारत स्लीपर रेक बनाने की योजना की घोषणा की थी, लेकिन अब तक केवल दो ही निर्मित हुए हैं।
यह घटना दर्शाती है कि रूट की घोषणा और वास्तविक ट्रेनसेट का परिचालन में आना दो अलग-अलग मील के पत्थर हैं। अगली वास्तविक विस्तार तब होगा जब रूट की घोषणा और वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट का प्रेरण, दोनों एक ही सेवा का वर्णन करेंगे।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
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स्रोत: यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रेलवे रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल रिपोर्ट पढ़ें



