जापानी इंजीनियरिंग के सहयोग से भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना को मिलेगी गति
मुख्य बिंदु (Key Highlights)
- भारत की पहली हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन का संचालन 15 अगस्त, 2027 से शुरू होने की उम्मीद है।
- यह ट्रेन मुंबई को गुजरात के अहमदाबाद से जोड़ेगी, जिससे यात्रा का समय 4 घंटे से अधिक कम हो जाएगा।
- जापानी शिंकनसेन तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जो भूकंप प्रतिरोधी और अत्यधिक सुरक्षित है।
- परियोजना में भारत की पहली अंडरसी सुरंग और सबसे लंबी पारंपरिक सुरंग का निर्माण शामिल है।
- शुरुआती चरण में, ट्रेन सूरत और वापी शहरों के बीच संचालित होगी।
नई दिल्ली: भारत अपने विशाल रेलवे नेटवर्क के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ा रहा है, जिसमें जापान के इंजीनियरों का सहयोग लिया जा रहा है। देश की पहली हाई-स्पीड 'बुलेट ट्रेन' परियोजना, जो मुंबई को अहमदाबाद से जोड़ेगी, अब अपने अंतिम चरण में है। परियोजना के सुचारू रूप से आगे बढ़ने पर, इसका संचालन 15 अगस्त, 2027 से शुरू होने की उम्मीद है।
यह महत्वाकांक्षी परियोजना भारत के दो प्रमुख शहरों, मुंबई (वित्तीय केंद्र) और अहमदाबाद (गुजरात राज्य में) के बीच यात्रा के समय को काफी कम कर देगी। वर्तमान में लगभग 300 मील लंबी इस रेल लाइन पर यात्रा में लगने वाले समय में 4 घंटे से अधिक की कटौती होगी। इस मार्ग पर सूरत, जो एक प्रमुख हीरा कटाई केंद्र है, को भी शामिल किया जाएगा।
इस परियोजना में जापानी इंजीनियरिंग की विशेषज्ञता और एक बड़े ऋण का उपयोग किया जा रहा है। भारतीय रेलवे के अतिरिक्त महानिदेशक, धर्मेंद्र तिवारी ने एएफपी को बताया, "पूरे कॉरिडोर पर काफी काम पूरा हो चुका है। बुलेट ट्रेन का पहला खंड 2027 में सूरत और वापी शहरों के बीच संचालित होगा।" वापी एक बड़ा रासायनिक विनिर्माण केंद्र है।
जापान की शिंकनसेन तकनीक, जिसकी गति 164 मील प्रति घंटे तक है, भूकंप प्रतिरोधी होने के साथ-साथ दशकों के असाधारण सुरक्षा और परिचालन रिकॉर्ड के लिए जानी जाती है। इस परियोजना को पूरा करने में कई राष्ट्रीय स्तर की पहली बार की जाने वाली निर्माण तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें भारत की पहली अंडरसी सुरंग और देश की सबसे लंबी पारंपरिक सुरंग का निर्माण शामिल है। हालांकि, भूमि अधिग्रहण और अन्य नियोजन संबंधी जटिलताओं के कारण परियोजना में पहले ही 4 साल की देरी हो चुकी है। भविष्य में, 2030 के दशक तक पुणे और चेन्नई जैसे तकनीकी केंद्रों तक विस्तार की भी योजना है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
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स्रोत: यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रेलवे रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल रिपोर्ट पढ़ें
