भारतीय रेलवे का बड़ा सुधार: निजी क्षेत्र के लिए वैगन डिजाइन के दरवाजे खुले | Indian Railways Major Reform: Wagon Design Opened to Private Sector
भारतीय रेलवे ने माल ढुलाई में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने और नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वैगन डिजाइन के दरवाजे निजी उद्योग के लिए खोल दिए हैं। यह सरकार के '52 हफ्तों में 52 सुधार' कार्यक्रम के तहत घोषित आठ नए सुधार उपायों में से एक है।
मुख्य बिंदु (Key Highlights)
- वैगन डिजाइन निजी क्षेत्र को: अब निजी कंपनियां कमोडिटी-विशिष्ट मालवाहक वैगन डिजाइन कर सकेंगी।
- RDSO की भूमिका: रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (RDSO) डिजाइनों का मूल्यांकन करेगा और प्रोटोटाइप को मंजूरी देगा।
- माल ढुलाई में वृद्धि का लक्ष्य: वर्तमान में देश के कुल माल ढुलाई का लगभग 27% रेलवे से होता है, जिसे बढ़ाने का लक्ष्य है।
- कंटेनर परिचालन में सुधार: उर्वरक, फ्लाई ऐश और खाद्यान्न जैसी वस्तुओं के लिए विशेष कंटेनरों को बढ़ावा।
- CTO लाइसेंस सरलीकरण: कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों (CTO) के लिए अब एक एकीकृत राष्ट्रव्यापी लाइसेंस होगा।
- निर्माण नियमों में सख्ती: ठेकेदारों के लिए प्रदर्शन सुरक्षा, बीमा और भूमि अधिग्रहण के मानदंड कड़े किए गए।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इन सुधारों का उद्देश्य व्यापार करने में आसानी में सुधार करना और रेलवे को अधिक माल ढुलाई यातायात हासिल करने में मदद करना है। उन्होंने बताया कि रेलवे का लक्ष्य माल ढुलाई में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना है, जिससे कार्बन उत्सर्जन कम होगा और लॉजिस्टिक्स लागत में तेजी से कमी आएगी।
वैगन डिजाइन नीति में बदलाव (Changes in Wagon Design Policy)
सबसे बड़ा नीतिगत बदलाव नई वैगन डिजाइन रूपरेखा है, जो मालवाहक वैगनों को डिजाइन करने की जिम्मेदारी रेलवे से निजी उद्योग को स्थानांतरित करती है। इस नीति के तहत, कोई भी डिजाइनर या निर्माता एक नया वैगन डिजाइन प्रस्तावित कर सकता है। RDSO द्वारा मूल्यांकन और परीक्षण के बाद, वैगनों को रेलवे नेटवर्क में शामिल किया जा सकता है। इससे उद्योगों की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार विशेष डिजाइन वाले वैगन बनाना संभव होगा, जिससे नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। तेल कंपनियों और अन्य उद्योगों को अब अपनी परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप टैंक वैगन डिजाइन करने की अनुमति होगी।
कंटेनर परिचालन और निर्माण मानदंड (Container Operations and Construction Norms)
सुधार पैकेज में उर्वरक, फ्लाई ऐश, खाद्यान्न, आटा और दालों सहित विभिन्न वस्तुओं के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए कंटेनरों के उपयोग को प्रोत्साहित करके कंटेनर के अधिक उपयोग को लक्षित किया गया है। कंटेनर व्यवसाय में, रेलवे ने मार्ग-विशिष्ट अनुमतियों को बदलते हुए एक एकीकृत राष्ट्रव्यापी कंटेनर ट्रेन ऑपरेटर (CTO) लाइसेंस पेश किया है। अब ऑपरेटरों को पूरे रेलवे नेटवर्क तक पहुंच के लिए ₹25 करोड़ का एक समान पंजीकरण शुल्क देना होगा। इसके अतिरिक्त, रेलवे ने निर्माण क्षेत्र के सुधारों की भी घोषणा की है, जिसका उद्देश्य ठेकेदार की पात्रता को कड़ा करना और परियोजना निष्पादन को सुव्यवस्थित करना है। ठेकेदारों को 10% प्रदर्शन सुरक्षा प्रदान करनी होगी और तभी वे बोली लगाने के पात्र होंगे जब लंबित मुकदमेबाजी का मूल्य उनकी नेट वर्थ के 50% से अधिक न हो।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
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स्रोत: यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रेलवे रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल रिपोर्ट पढ़ें
