दक्षिणी रेलवे के राजस्व में तिरुवनंतपुरम-मंगलुरु वंदे भारत एक्सप्रेस सबसे आगे: जानिए क्यों बनी यह प्रीमियम ट्रेन यात्रियों की पहली पसंद

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Railway News Desk
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दक्षिणी रेलवे के राजस्व में तिरुवनंतपुरम-मंगलुरु वंदे भारत एक्सप्रेस सबसे आगे: जानिए क्यों बनी यह प्रीमियम ट्रेन यात्रियों की पहली पसंद

दक्षिणी रेलवे की तिरुवनंतपुरम-मंगलुरु वंदे भारत एक्सप्रेस ने राजस्व और बुकिंग में सभी सेवाओं को पीछे छोड़ दिया है। जानें इस प्रीमियम ट्रेन की सफलता के राज और यात्रियों पर इसका प्रभाव।

तिरुवनंतपुरम-मंगलुरु वंदे भारत एक्सप्रेस ने दक्षिणी रेलवे के राजस्व में शीर्ष स्थान हासिल किया

तिरुवनंतपुरम: दक्षिणी रेलवे की तिरुवनंतपुरम-मंगलुरु वंदे भारत एक्सप्रेस ने राजस्व सृजन में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है, जो इसे दक्षिणी रेलवे की सभी वंदे भारत सेवाओं में सबसे अधिक कमाई वाली ट्रेन बनाता है। यह उपलब्धि केरल और कर्नाटक के बीच प्रीमियम रेल यात्रा की बढ़ती लोकप्रियता को रेखांकित करती है। यह ट्रेन आधुनिक, तेज और आरामदायक रेल सेवाओं के लिए यात्रियों की बढ़ती प्राथमिकता को दर्शाती है, भले ही इसी गलियारे पर पारंपरिक ट्रेन विकल्प उपलब्ध हों।

राजस्व रैंकिंग में तिरुवनंतपुरम-मंगलुरु मार्ग सबसे आगे

दक्षिणी रेलवे द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 20632 तिरुवनंतपुरम-मंगलुरु वंदे भारत एक्सप्रेस ने अगस्त और अक्टूबर 2025 के बीच की रिपोर्टिंग अवधि में ₹73.35 लाख का राजस्व अर्जित किया। इस कमाई ने इसे केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश सहित दक्षिणी रेलवे द्वारा संचालित सभी वंदे भारत सेवाओं में शीर्ष स्थान पर पहुंचा दिया। यह मार्ग भारत के दक्षिण-पश्चिमी तट पर कई महत्वपूर्ण वाणिज्यिक, शैक्षिक और पर्यटन केंद्रों को जोड़ता है, जिससे यह क्षेत्र के सबसे अधिक यात्रा वाले रेल गलियारों में से एक बन गया है। यह सेवा विशेष रूप से व्यावसायिक यात्रियों, पेशेवरों, छात्रों और पर्यटकों के बीच लोकप्रिय हो गई है, जो कम यात्रा समय और बेहतर ऑनबोर्ड सुविधाओं की तलाश में रहते हैं।

वंदे भारत ट्रेनों में उच्चतम यात्री बुकिंग

इस ट्रेन ने दक्षिणी रेलवे के वंदे भारत बेड़े में सबसे अधिक बुकिंग संख्या भी दर्ज की। रिपोर्टिंग अवधि के दौरान, इसने 11,896 बुकिंग दर्ज कीं, जो अन्य मार्गों से काफी अधिक है। तुलनात्मक रूप से, चेन्नई एग्मोर-नागरकोइल वंदे भारत एक्सप्रेस में 2,832 बुकिंग दर्ज की गईं, जबकि कोयंबटूर जंक्शन-बेंगलुरु कैंटोनमेंट वंदे भारत एक्सप्रेस में 835 बुकिंग दर्ज की गईं। ये आंकड़े इस क्षेत्र में अन्य प्रीमियम मार्गों की तुलना में तिरुवनंतपुरम-मंगलुरु सेवा के लिए असाधारण रूप से मजबूत मांग का संकेत देते हैं। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि इस मार्ग की सफलता प्रमुख शहरी केंद्रों को जोड़ने, यात्रा समय को कम करने और यात्रियों को अधिक आरामदायक यात्रा अनुभव प्रदान करने की क्षमता से उपजी है।

दक्षिणी रेलवे के तहत कई वंदे भारत सेवाओं, जिनमें मंगलुरु-तिरुवनंतपुरम मार्ग भी शामिल है, ने लगातार 100 प्रतिशत से अधिक ऑक्यूपेंसी स्तर की सूचना दी है। ऐसे आंकड़े गतिशील सीट आवंटन प्रणालियों और मध्यवर्ती स्टेशनों पर यात्री टर्नओवर के कारण संभव हैं। उच्च ऑक्यूपेंसी दरें यात्रियों के बीच वंदे भारत ट्रेनों की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाती हैं। अपनी शुरुआत के बाद से, इन ट्रेनों ने बेहतर सीटिंग, उन्नत सुरक्षा प्रणालियों, ऑनबोर्ड कैटरिंग विकल्पों, स्वचालित दरवाजों और कम यात्रा समय जैसी सुविधाओं के कारण लगातार लोकप्रियता हासिल की है।

दक्षिणी रेलवे के वंदे भारत नेटवर्क का तीव्र विकास

तिरुवनंतपुरम-मंगलुरु सेवा की सफलता दक्षिणी रेलवे के वंदे भारत नेटवर्क में व्यापक विकास के बीच आई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान, दक्षिणी रेलवे की वंदे भारत सेवाओं ने 77.38 लाख यात्रियों को ढोया और ₹803.86 करोड़ का राजस्व अर्जित किया। यह आंकड़े पिछले वित्तीय वर्ष से एक महत्वपूर्ण उछाल का प्रतिनिधित्व करते हैं, जब सेवाओं ने 54.12 लाख यात्रियों को ढोया था और ₹540.65 करोड़ का राजस्व अर्जित किया था। यह वृद्धि भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण और यात्रियों को विश्व स्तरीय सुविधाएं प्रदान करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

पृष्ठभूमि: वंदे भारत एक्सप्रेस का उदय

वंदे भारत एक्सप्रेस, जिसे पहले ट्रेन 18 के नाम से जाना जाता था, भारत की पहली सेमी-हाई-स्पीड ट्रेन है जिसे पूरी तरह से 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत डिजाइन और निर्मित किया गया है। इसका उद्देश्य यात्रियों को तेज, सुरक्षित और आरामदायक यात्रा अनुभव प्रदान करना है। पहली वंदे भारत एक्सप्रेस 2019 में दिल्ली-वाराणसी मार्ग पर शुरू की गई थी। तब से, भारतीय रेलवे ने देश भर में इन ट्रेनों का तेजी से विस्तार किया है, जिससे प्रमुख शहरों के बीच कनेक्टिविटी में सुधार हुआ है। दक्षिणी रेलवे ने इस विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे दक्षिणी राज्यों को आधुनिक रेल नेटवर्क का लाभ मिल रहा है। यह ट्रेन सेट अत्याधुनिक सुविधाओं और वातानुकूलित कोचों से सुसज्जित है, जो इसे पारंपरिक ट्रेनों से अलग बनाता है।

विभिन्न वर्गों पर प्रभाव

दैनिक यात्री और व्यवसायी

तिरुवनंतपुरम-मंगलुरु वंदे भारत एक्सप्रेस ने दैनिक यात्रियों और व्यवसायियों के लिए यात्रा को अधिक कुशल बना दिया है। कम यात्रा समय का मतलब है कि वे अपने गंतव्यों तक तेजी से पहुंच सकते हैं, जिससे उनकी उत्पादकता बढ़ती है और व्यक्तिगत समय बचता है। यह विशेष रूप से उन पेशेवरों के लिए फायदेमंद है जिन्हें अक्सर इन दो शहरों या बीच के स्टेशनों के बीच यात्रा करनी पड़ती है।

पर्यटक

केरल और कर्नाटक दोनों ही अपने समृद्ध पर्यटन स्थलों के लिए जाने जाते हैं। वंदे भारत एक्सप्रेस ने पर्यटकों के लिए इन राज्यों के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचना आसान बना दिया है। आरामदायक यात्रा अनुभव, सुंदर दृश्यों के साथ, पर्यटन को बढ़ावा देता है और अधिक घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करता है। यह स्थानीय पर्यटन उद्योग के लिए एक बड़ा वरदान है।

छात्र

कई छात्र शिक्षा या परीक्षा के लिए इन शहरों के बीच यात्रा करते हैं। वंदे भारत ट्रेन उन्हें सुरक्षित और समय पर अपने गंतव्य तक पहुंचने में मदद करती है, जिससे उनकी यात्रा का तनाव कम होता है। यह विशेष रूप से उन छात्रों के लिए महत्वपूर्ण है जो अपने गृहनगर और शैक्षणिक संस्थानों के बीच नियमित रूप से आवागमन करते हैं।

स्थानीय अर्थव्यवस्था

वंदे भारत ट्रेनों के संचालन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलता है। बेहतर कनेक्टिविटी से व्यापार और वाणिज्य में वृद्धि होती है। रेलवे स्टेशनों के आसपास के छोटे व्यवसायों को भी यात्रियों की बढ़ती संख्या से लाभ होता है। इसके अलावा, रखरखाव और संचालन के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होते हैं।

यात्रियों के लिए क्या बदलेगा?

वंदे भारत एक्सप्रेस से यात्रियों के यात्रा अनुभव में कई महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं:

  • तेज यात्रा: यह ट्रेन पारंपरिक ट्रेनों की तुलना में काफी कम समय में गंतव्य तक पहुंचाती है।
  • आधुनिक सुविधाएं: स्वचालित दरवाजे, आरामदायक रिक्लाइनिंग सीटें, ऑनबोर्ड वाई-फाई, इंफोटेनमेंट सिस्टम और बेहतर कैटरिंग विकल्प यात्रियों को एक प्रीमियम अनुभव प्रदान करते हैं।
  • बेहतर सुरक्षा: उन्नत सुरक्षा प्रणालियां और सीसीटीवी निगरानी यात्रियों को मानसिक शांति प्रदान करती हैं।
  • स्वच्छता: वंदे भारत ट्रेनों में उच्च स्तर की स्वच्छता बनाए रखी जाती है, जो यात्रियों के लिए एक सुखद वातावरण सुनिश्चित करती है।
  • पर्यावरण-मित्रता: ये ट्रेनें ऊर्जा कुशल हैं और पर्यावरण पर कम प्रभाव डालती हैं।

आगे क्या होगा?

भारतीय रेलवे वंदे भारत एक्सप्रेस नेटवर्क का विस्तार करने और यात्रियों को बेहतर सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। भविष्य में, हम निम्नलिखित विकास देख सकते हैं:

  • नई वंदे भारत मार्गों की शुरुआत: देश भर में और अधिक वंदे भारत मार्गों की घोषणा की जाएगी, जिससे प्रमुख शहरों के बीच कनेक्टिविटी और मजबूत होगी।
  • वंदे स्लीपर और वंदे मेट्रो: लंबी दूरी की यात्रा के लिए वंदे स्लीपर और शहरी/उपशहरी मार्गों के लिए वंदे मेट्रो जैसी नई वंदे भारत संस्करणों को पेश करने की योजना है।
  • तकनीकी उन्नयन: नई ट्रेनों में और भी उन्नत तकनीक और सुविधाएं शामिल की जाएंगी, जैसे बेहतर सस्पेंशन सिस्टम और अधिक ऊर्जा कुशल प्रणोदन।
  • रखरखाव सुविधाओं का विस्तार: वंदे भारत ट्रेनों के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए रखरखाव डिपो और सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।

तिरुवनंतपुरम-मंगलुरु वंदे भारत एक्सप्रेस की सफलता भारतीय रेलवे के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो यह दर्शाता है कि आधुनिक और कुशल रेल सेवाएं देश के विकास में कैसे योगदान कर सकती हैं। यह यात्रियों की बदलती अपेक्षाओं और बेहतर यात्रा विकल्पों की बढ़ती मांग का भी प्रमाण है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Q1. तिरुवनंतपुरम-मंगलुरु वंदे भारत एक्सप्रेस ने कितना राजस्व अर्जित किया?
तिरुवनंतपुरम-मंगलुरु वंदे भारत एक्सप्रेस ने अगस्त और अक्टूबर 2025 के बीच की रिपोर्टिंग अवधि में ₹73.35 लाख का राजस्व अर्जित किया, जो दक्षिणी रेलवे में किसी भी वंदे भारत सेवा में सबसे अधिक है।
Q2. यह वंदे भारत सेवा दक्षिणी रेलवे में इतनी लोकप्रिय क्यों है?
यह ट्रेन प्रमुख शहरी केंद्रों को जोड़ती है, यात्रा समय को कम करती है, और यात्रियों को बेहतर सीटिंग, आधुनिक सुविधाएं, और आरामदायक यात्रा अनुभव प्रदान करती है, जिससे यह यात्रियों की पहली पसंद बन गई है।
Q3. दक्षिणी रेलवे की अन्य वंदे भारत ट्रेनों की तुलना में इसकी बुकिंग कैसी रही?
इस ट्रेन ने 11,896 बुकिंग दर्ज कीं, जबकि चेन्नई एग्मोर-नागरकोइल वंदे भारत में 2,832 और कोयंबटूर जंक्शन-बेंगलुरु कैंटोनमेंट वंदे भारत में 835 बुकिंग हुईं, जो इसकी असाधारण लोकप्रियता को दर्शाता है।
Q4. वंदे भारत ट्रेनों में 100% से अधिक ऑक्यूपेंसी कैसे संभव है?
यह गतिशील सीट आवंटन प्रणालियों (dynamic seat allocation systems) और मध्यवर्ती स्टेशनों पर यात्रियों के उतरने-चढ़ने (passenger turnover at intermediate stations) के कारण संभव होता है, जिससे एक ही सीट पर यात्रा के दौरान कई यात्री टिकट बुक कर पाते हैं।
Q5. दक्षिणी रेलवे के वंदे भारत नेटवर्क का समग्र प्रदर्शन कैसा रहा है?
वित्तीय वर्ष 2025-26 में, दक्षिणी रेलवे की वंदे भारत सेवाओं ने 77.38 लाख यात्रियों को ढोया और ₹803.86 करोड़ का राजस्व अर्जित किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में महत्वपूर्ण वृद्धि है।

स्रोत: यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रेलवे रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल रिपोर्ट पढ़ें

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